11. होली (बाल कविता)
बसंत के स्वागत में होली का त्यौहार
फागुन की पूर्णिमा को आता हर बार
हिरण्यकश्यप नामक राजा था एक
भगवान विष्णु से था उसे बैर विशेष
राजा का एक पुत्र था नाम प्रह्लाद
जो विष्णु को हर समय करता था याद
पिता ने अपने पुत्र को बहुत समझाया
विष्णु भक्ति तजने तईं बहुत धमकाया
प्रह्लाद की प्रभु विष्णु भक्ति अटल रही
उसके संहार की हर कोशिश विफल रही
फिर राजा ने बहन होलिका को बुलाया
जिसने न जलने का वरदान था पाया
गोदी में लेकर उसे अग्नि में जा बैठी
बुआ प्रह्लाद वध की बाज़ी लगा बैठी
तभी प्रभु लीला से एक चमत्कार हुआ
प्रह्लाद बच गया, होलिका संहार हुआ
हम बुराई के प्रतीक को जलाते हैं
और खेल कर रंग, खुशियां मनाते हैं
— भगत राम मंडोत्रा
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