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Showing posts from March, 2022

20. मोबाइल (बाल कविता)

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   मोबाइल (बाल कविता) विज्ञान की अनोखी खोज मोबाइल, प्रयोग करते हैं  सभी रोज मोबाइल.           कर सकते हैं कहीं से भी कहीं बात,           हाथ  में  लेकर सभी लोग मोबाइल. छोटा  कंप्यूटर  जेब में समा जाए, कैसे भी करे कोई प्रयोग मोबाइल.           सोसल मीडिया का समर्थ संवाहक,           लगा  देता  है  बड़ी  मौज मोबाइल. दिखाने बांटने के लिए हुनर अपना, एक  तरीका  है अनमोल  मोबाइल.          अति  हर  चीज  की बुरी होती है साथी,          ज़रा सोच समझ कर ही खोल मोबाइल.          ― भगत राम मंडोत्रा

19. रोज का काम रोज करो

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रोज का काम रोज करो रोज  का  काम  रोज करो, फिर खूब मस्ती मौज करो.                कल पर जो काम को छोड़े,                अपनी  राह  में  डाले  रोड़े. स्कूल में सीख  घर दोहराओ, अगला  पाठ पढ़ कर जाओ.                'टाइम    टेबल'    तुम    बनाओ,                मुताबिक उसके फिर जुट जाओ. खाओ  पीयो  और  खेलो, मजे बचपन के तुम ले लो.                जो  बचपन  का सदुपयोग करे,                 जीवन भर बचपन सहयोग करे.       ...

18. सीढ़ियां (बाल कविता)

      सीढ़ियां (बाल कविता) चंद  सदस्यों   से  'परिवार' बने, चंद  परिवार  बनाते  इक 'ग्राम'. चंद  गांवों  से   'पंचायत'   बने, लोक कल्याण है जिसका काम.            पंचायतों  से 'विकास खंड' बने,            जहां 'बी.डी.ओ' का होता बास.            विकास खंड हैं 'तहसील' बनाते,            'तहसीलदार'  होता जहां  खास. तहसीलें  मिल  'उपमंडल'  बनाएं, 'एस.डी.एम'   वहां  डंका  बजाएं. 'उपमंडल' मिल कर  जिला रचाएं, 'डिप्टी कमिश्नर' का प्रशासन पाएं.             कई जिले मिल कर बनाते 'मंडल',             'कमिश्नर'  होते  जिनके  कर्णधार.  ...

17. गान और गीत (बाल कविता)

  गान और गीत (बाल कविता) रवीन्द्रनाथ  टैगोर  द्वारा  रचित 'जन  गण मन'  राष्ट्रीय गान  है कैप्टन  राम  सिंह   ठाकुर  ‌ ने रची  इसकी  कर्णप्रिय तान  है आदर   के  साथ  गाया  जाता यह भारत वर्ष का अभिमान है बंकिम चन्‍द्र चटर्जी का  लिखा 'बन्दे मातरम'  राष्ट्रीय  गीत  है आजादी   की  लड़ाई  में  यह  रहा   प्रेरणा   का   प्रतीक   है 'राष्ट्रीय गान' हमारा वर्तमान  है 'राष्ट्रीय गीत' से जुड़ा अतीत है ― भगत राम मंडोत्रा

16. परीक्षा (बाल कविता)

परीक्षा (बाल कविता) जांचने  के लिए किसी बिषय का ज्ञान, समय -  समय  पर  होते  हैं  इम्तिहान. जब-जब  भी  परीक्षा  के दिन हैं आते, परीक्षार्थी  खुद  को  तनाव  में  हैं पाते. खाना-पीना, सुख-चैन  बिसर जाता है, हंसता-खेलता  जीवन बिखर जाता  है. अगर इस तनाव से है किसी को बचना, तो उसे एक  'टाइम टेबल'  होगा रचना. जब  हम  शुरू  से  ही   करेंगे   तैयारी, तो  नहीं  होगी  आखिर  में  मारा-मारी. परिश्रम  का  फल हमेशा मीठा होता है, भाग्य  के  भरोसे  रहने  वाला  रोता  है. ― भगत राम मंडोत्रा

15. आकाश (बाल कविता)

आकाश (बाल कविता) धरती के ऊपर ये आकाश देता है  छतरी का आभास                रात को काला  दिन में नीला                अनंत अपार ईश्वर की लीला बादल  निराली  छटा बिखेरें विचित्र आकृतियों को उकेरें                दिन में दिवाकर दमकता है                रात को  चंद्रमा चमकता है रात को सितारों की बारात  लाती है नजारों की सौगात                नभ,व्योम,गगन,अम्बर,आसमान,                शून्य,पुष्कर,अनन्त हैं  अभिधान पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि,आकाश इन्हीं  से  हुआ  सृष्टि का विकास — भगत राम मंडोत्रा

14. वर्षा (बाल कविता)

वर्षा (बाल कविता) कभी बूंद-बूंद कभी फुहार बौछार   कभी  मूसलाधार                      वर्षा जब-जब भी होती है                      आँचल धरा  का  धोती है जब धूप धरा पर पड़ती है पानी  से  भाप  घड़ती  है                      गर्म भाप ऊपर  जाती है                      गगन में बादल रचाती है             ठंड से वाष्प बूंद बन जाता वर्षा  बन  धरती  पर आता                     ...

13. पेड़ (बाल गीत)

  पेड़ (बाल गीत) आखों  को  खूब  सुहाते पेड़ धरती  को  स्वर्ग  बनाते  पेड़ पक्षी शाखाओं पर घर बनाते छाया  में  जीव  सुरक्षा  पाते वायु   में   शुद्धता  लाते  पेड़ सांस  को  सहज  बनाते पेड़              बर्षा  के  जल  को  सोखते हैं             भूमि  के  क्षरण  को रोकते हैं              पारे   को    चढ़ने   नहीं   देते               प्रदूषण  को   बढ़ने  नहीं  देते              कागज़, गोंद, रबर दिलाते पेड़              कन्द-मूल फल हैं खिलाते पेड़...

12. गेहूं का आटा (बाल कविता)

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  गेहूं का आटा (बाल कविता)      मोटी, पतली, बड़ी कभी छोटी       गूंथ  कर आटा, है बनती  रोटी                 रोटी   के  लिए  चाहिए  आटा                जानें  कहां  से  है आता आटा      मौसम  का  इंतजार  हैं   करते      किसान  खेत  तैयार  हैं   करते                बीज  गेहूं  का  है  बोया  जाता                कुछ दिनों में बाहर अंकुर आता      खेत  हरियाली  से   हैं   लहलाते       खाद, पानी, मेहनत  रंग  दिखाते                 पौधों पर बालियां जब आ  जातीं                 क...

11. होली (बाल कविता)

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  11 .  होली (बाल कविता) बसंत के स्वागत में होली का त्यौहार फागुन की पूर्णिमा को आता हर बार         हिरण्यकश्यप नामक राजा था  एक         भगवान विष्णु से था उसे बैर विशेष राजा  का  एक  पुत्र  था  नाम  प्रह्लाद जो विष्णु को हर समय करता था याद         पिता ने अपने पुत्र  को बहुत समझाया         विष्णु भक्ति तजने तईं  बहुत धमकाया प्रह्लाद की प्रभु विष्णु भक्ति  अटल  रही उसके संहार की हर कोशिश विफल रही         फिर राजा ने बहन होलिका को बुलाया          जिसने न जलने का  वरदान  था  पाया गोदी में  लेकर उसे अग्नि में जा बैठी  बुआ प्रह्लाद वध की बाज़ी लगा बैठी          तभी प्रभु लीला से एक चमत्कार हुआ     ...

10. हवा (बाल कविता)

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  10.     हवा (बाल कविता) पांच  तत्वों  में  से  एक  होती  है   हवा, दिखे नहीं पर, जगह हरेक होती है हवा। मंद-मंद  चले  तो  सुखद  लगती है हवा, आंधी बन जाए तो बहुत खलती है हवा। सर्दियों में ठंडक को बढ़ाती है हवा, गर्मियों  में  राहत  पहुंचाती है हवा। समुद्र  से  गर्म  भाप  ले  जाती  है  हवा, फिर नभ में बादल उससे बनाती है हवा। शुद्ध अवस्था में प्राण बन जाती  है  हवा, प्रदूषित हो तो बिमारियां फैलाती है हवा। समस्त  ब्रह्माण्ड  में  विद्यमान  है  हवा, प्रकृति का एक बहुमूल्य वरदान है हवा। — भगत राम मंडोत्रा

9. किताबें (बाल कविता)

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9 .   किताबें (बाल कविता ) अनुभूतियों  का अंबार किताबें। अथाह ज्ञान का भंडार किताबें। किसी  ने   समेटा  इतिहास  है,  किसी  में  विज्ञान  का  वास है, तो कहीं  छुपी  प्रेरणा  खास है, समाय  बैठी   संसार   किताबें। अनुभूतियों  का अंबार किताबें। अथाह ज्ञान का भंडार किताबें। साहित्य  सुधी   सरोबर   हैं  ये, पुरखों  की अतुल धरोहर  हैं ये, मनभावन  और  मनोहर  हैं  ये, मधुर   संगीत  झंकार  किताबें। अनुभूतियों  का अंबार किताबें। अथाह ज्ञान का भंडार किताबें। इनमें कुछ  धार्मिक और पवित्र, पाठकों  में   रचतीं  सद  चरित्र, मनुष्य  की अटूट  अभिन्न मित्र,  मानवता का अलंकार  किताबें। अनुभूतियों  का अंबार किताबें। अथाह ज्ञान का भंडार किताबें। भले   बुरे   में   अंतर  सिखाएं, रास्ता मंजिल तक का  दिखाएं, अकेलापन    ये    दूर   भगाएं, गुणी  घर...

8. ऋतुएं (बाल कविता)

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  8.   ऋतुएं (बाल कविता) लट्टू समान घूमती  धरती  रवि की है परिक्रमा करती                  वर्ष  में  चक्कर पूरा लगाए                  फलतः प्रकृति ऋतुएं रचाए साल में  छः ऋतुएं हैं आतीं जीवन को सुखद हैं बनातीं                  ऋतुएं  हमें  व्यस्त हैं रखतीं                  तन और मन मस्त हैं रखतीं ग्रीष्म, बर्षा, शरत् , हेमन्त, फिर हैं आते शिशिर, वसंत                  हर ऋतु मात्र दो माह आए                  धरती पर धन-धान्य उगाए मौसम जाते हैं ...