14. वर्षा (बाल कविता)
वर्षा (बाल कविता)
कभी बूंद-बूंद कभी फुहार
बौछार कभी मूसलाधार
वर्षा जब-जब भी होती है
आँचल धरा का धोती है
जब धूप धरा पर पड़ती है
पानी से भाप घड़ती है
गर्म भाप ऊपर जाती है
गगन में बादल रचाती है
ठंड से वाष्प बूंद बन जाता
वर्षा बन धरती पर आता
गर्म होकर पानी ऊपर जाए
ठंडा होकर पृथ्वी पर आए
कुदरत जब ये क्रम दोहराए
तब धरती पर वर्षा आए
― भगत राम मंडोत्रा
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