8. ऋतुएं (बाल कविता)
8. ऋतुएं (बाल कविता)
लट्टू समान घूमती धरती
रवि की है परिक्रमा करती
वर्ष में चक्कर पूरा लगाए
फलतः प्रकृति ऋतुएं रचाए
साल में छः ऋतुएं हैं आतीं
जीवन को सुखद हैं बनातीं
ऋतुएं हमें व्यस्त हैं रखतीं
तन और मन मस्त हैं रखतीं
ग्रीष्म, बर्षा, शरत् , हेमन्त,
फिर हैं आते शिशिर, वसंत
हर ऋतु मात्र दो माह आए
धरती पर धन-धान्य उगाए
मौसम जाते हैं आते हैं
वर्ष यूं ही गुज़र जाते हैं
— भगत राम मंडोत्रा
Comments
Post a Comment