15. आकाश (बाल कविता)
आकाश (बाल कविता)
धरती के ऊपर ये आकाश
देता है छतरी का आभास
रात को काला दिन में नीला
अनंत अपार ईश्वर की लीला
बादल निराली छटा बिखेरें
विचित्र आकृतियों को उकेरें
दिन में दिवाकर दमकता है
रात को चंद्रमा चमकता है
रात को सितारों की बारात
लाती है नजारों की सौगात
नभ,व्योम,गगन,अम्बर,आसमान,
शून्य,पुष्कर,अनन्त हैं अभिधान
पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि,आकाश
इन्हीं से हुआ सृष्टि का विकास
— भगत राम मंडोत्रा
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