12. गेहूं का आटा (बाल कविता)
गेहूं का आटा (बाल कविता)
मोटी, पतली, बड़ी कभी छोटी
गूंथ कर आटा, है बनती रोटी
रोटी के लिए चाहिए आटा
जानें कहां से है आता आटा
मौसम का इंतजार हैं करते
किसान खेत तैयार हैं करते
बीज गेहूं का है बोया जाता
कुछ दिनों में बाहर अंकुर आता
खेत हरियाली से हैं लहलाते
खाद, पानी, मेहनत रंग दिखाते
पौधों पर बालियां जब आ जातीं
कोशिशें कृषकों की हैं फल लातीं
गेहूं के जब पक जाते हैं दाने
पड़ते पौधों से अलग करवाने
दानों को चक्की में पीसा जाता
इस तरह बनता गेहूँ का आटा
— भगत राम मंडोत्रा
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