4. खेल (बाल कविता)
4. खेल (बाल कविता)
आओ साथी खेलें खेल
खेल बढ़ायें आपसी मेल
तन में स्फूर्ति की दौड़े रेल
फिर सुस्ती जाए लेने तेल
आओ साथी खेलें खेल
खेल बढ़ायें आपसी मेल
मिलकर काम करना सीखें
बाधाओं से लड़ना सीखें
मुसीबत से न डरना सीखें
डूब न जाएं, तरना सीखें
आओ साथी खेलें खेल
खेल बढ़ायें आपसी मेल
नेतृत्व के ये गुण सिखाते
आज हार कल जीत दिखाते
बैर भाव को दूर भगाते
जीवन को हैं सुखद बनाते
आओ साथी खेलें खेल
खेल बढ़ायें आपसी मेल
― भगत राम मंडोत्रा
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