27. चिड़िया (बाल कविता)

 27.  चिड़िया (बाल कविता)


सुबह-सबेरे  शीघ्र  उठ  जाती चिड़िया।

अपने काम में फिर जुट जाती चिड़िया।


चूं-चूं  चीं-चीं  की  मधुर  धुन  सुनाकर,

सुबह जगने वालों को रिझाती चिड़िया।


दूर-दूर  जाकर  दाना-दुनका  चुनती,

खुद मेहनत करके है खाती चिड़िया।


तिनका-तिनका लाकर अपनी चोंच से,

घोंसला सुंदर सा फिर बनाती चिड़िया।


निज नीड़ को सजा कर नन्हे अंडों से,

अपने साथी संग घर बसाती चिड़िया।


अंडों  से  बच्चे  जब  बाहर   हैं   आते, 

प्यार से चुगा ला कर खिलाती चिड़िया।


नन्हों  के  जब पंख निकल हैं आते, 

अभ्यास उड़ने का कराती चिड़िया।


जब - जब   कोई   संकट   सामने  आए,

निड़र हो कर उससे भिड़ जाती चिड़िया।


       — भगत राम मंडोत्रा




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