28. सफलता की कूंजी (बाल कविता)
सफलता की कूंजी (बाल कविता)
आसान भला कोई काम नहीं होता,
काम किए बिना कभी नाम नहीं होता।
जो आज है करना उसे अभी है करना,
और कल का भरोसा न कभी है करना।
पहले अपने बड़ों से उसकी बात करो,
फिर आज ही नए काम की शुरुआत करो।
चैन से रात को गहरी नींद है सोता,
जो आज का काम कल तक नहीं ढोता।
जो भी है करना मन लगा कर करना,
उसे हर हालत में फिर पूरा है करना।
मेहनत व लग्न जहां भरपूर हैं होतीं,
मंजिलें वहां से नहीं दूर हैं होतीं।
बस परिश्रम ही है सफलता की कूंजी,
और सफलता है जीवन भर की पूंजी।
— भगत राम मंडोत्रा
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