29. स्वास्थ्य (बाल कविता)
29. स्वास्थ्य (बाल कविता)
स्वस्थ तन में है बसता स्वस्थ मन,
स्वास्थ्य होता है एक अनमोल धन।
स्वास्थ्य हो तो खुशियों का अर्थ है,
बगैर स्वास्थ्य के सब कुछ व्यर्थ है।
खो कर सहज नहीं होता पाना,
रूठे तो मुश्किल इसे मनाना।
नींव पर टिकती इमारत सारी,
स्वस्थ बालपन का महत्व भारी।
फास्ट फूड व कोल्ड ड्रिंक सियापा,
ज़रा सा स्वाद दे विकट मोटापा।
निज खान-पान को तुरंत सुधारो,
स्वाद के लिए न स्वास्थ्य बिगाड़ो।
खेलो - कूदो, कसरत, योग करो,
शुद्ध, सात्विक व पौष्टिक भोग करो।
— भगत राम मंडोत्रा
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