30. फसलों के प्रकार (बाल कविता)
30. फसलों के प्रकार (बाल कविता)
आदिकाल में मानव कन्द-मूल खाता था,
पेड़ पौधों से अपना भोजन पाता था।
धरती पर ज्यों-ज्यों मानव का विकास हुआ,
भोजन की क़िल्लत का उसको आभास हुआ।
आवश्यकता ने दिया जन्म अविष्कार को,
कृषि करना सीखी उसने निज उद्धार को।
धरती खोद कर बीज रोपण करने लगा,
उगा कर फसलें पेट अपना भरने लगा।
हम भारतीय जिस भूभाग में आते हैं,
वहां ऋतु अनुसार फसलें तीन उगाते हैं।
मई से जुलाई तक जो हैं बीजी जातीं,
वे बरसाती फसलें 'खरीफ' हैं कहलातीं।
धान,मक्का,बाजरा 'खरीफ' में हैं आते,
सितंबर-अक्टूबर में वो काटे हैं जाते।
अक्टूबर - दिसंबर में जो हैं बोई जातीं।
शीत काल की वे फसलें 'रबी' हैं कहलातीं।
गेहूं, चना, सरसों, आलू इसमें हैं आते,
जो फरवरी-अप्रैल में निकाले हैं जाते।
जो रबी व खरीफ के बीच उगाई जातीं,
वे फसलें 'जायद' फसलें हैं कहलातीं।
'जायद' फसलों में शामिल सब्जियां ज्यादा,
किसानों को जिनसे होता खूब फायदा।
— भगत राम मंडोत्रा
Comments
Post a Comment