31. सौरमंडल (बाल कविता)

 31.  सौरमंडल (बाल कविता)


सौर मंडल के बारे में  बैज्ञानिक  कहते  हैं,

वहां खगोलीय पिंड आपस में बंधे रहते हैं।


गुरुत्वाकर्षण  उनमें   एक   दूरी   बनाता   है, 

और अपने-अपने परिक्रमा पथ पर घुमाता है।


उन पिंडों में ग्रह, उपग्रह और धूमकेतु संग,

क्षुद्रग्रह और उल्कापिंड भी हैं दिखाते  रंग।


सौरमंडल के मध्य में सबसे बड़ा  एक  तारा,

असीम ऊर्जा का स्त्रोत  है वह सूरज हमारा।


ये  सभी पिंड  सूर्य  के  गिर्द  चक्कर  लगाते  हैं,

और सभी साथ मिल कर सौर मंडल कहलाते हैं।


कुल मिलाकर सौरमंडल में आठ ग्रह हैं  खास,

सबसे छोटा  'बुध' है उनमें सूर्य के सबसे पास।


दूसरे नंबर पर 'शुक्र' ग्रह की आती  है  बारी,

जिसकी चमक और सुंदरता है सबसे न्यारी।


हमारा 'पृथ्वी' ग्रह तीसरे नंबर पर है आता, 

ग्रहों में केवल इसमें  है जीवन पाया जाता। 


क्रम मे चौथे नंबर पर मंगल  ग्रह  है  आता,

जिसका पृथ्वी से मिलता-जुलता है खाका।


फिर क्रमशः बृहस्पति,शनि,अरुण, वरुण है आते,

सौरमंडल   में   अपना - अपना  असर  दिखाते।


— भगत राम मंडोत्रा

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