32. चावल (बाल कविता)
32. चावल (बाल कविता)
हम सभी बड़े चाव से चावल खाते हैं,
आओ जानें कैसे वे थाली तक आते हैं।
कार्बोहाइड्रेट की खान हैं चावल,
सरल सुपाच्य अनाजों की शान हैं चावल।
पहले किसान करते धान की बुआई,
फिर तैयार पौध की होती है रोपाई।
खरीफ की फसलों में से एक है धान,
चाहिए प्रचुर जल और उच्च तापमान।
चंद महीनों में फसलें लहलहाती हैं,
पौधों पर धान की बालियां आती हैं।
जब बालियों के पक जाते पूरे दाने,
कृषक को अलग करने पड़ते हैं कराने।
धान कुट्टी में धान डाले हैं जाते,
अलग होकर भूसी चावल बाहर आते।
चावलों के होते हैं कई प्रकार आकार,
जो बनाते हैं सब के लिए सन्तुलित आहार।
बासमती चावल की होती सुगंध सुहानी,
अन्य किस्मों की भी अपनी-अपनी कहानी।
जो चावल जितना हो जाता है पुराना,
उतना ही बढिया उससे बनता है खाना।
— भगत राम मंडोत्रा
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