33. पृथ्वी दिवस (बाल कविता)
33. पृथ्वी दिवस (बाल कविता)
बाईस अप्रैल को हर वर्ष,
पृथ्वी दिवस मनाते हैं।
पर्यावरण बचाने के लिए,
सभी देश कसमें खाते हैं।
ताकि ग्रह के लिए घातक,
मानव गतिविधियां कम हों।
पर्यावरण बचाने हेतु,
समस्त प्रयासों में दम हो।
ग्लोबल वार्मिंग की बजह से,
धरती का पारा चढ़ रहा।
विषैली गैसों के कारण,
जीवन को खतरा बढ़ रहा।
ग्रीन हाउस गैसों में बढ़त,
पॉलीथिन बन गई सिरदर्द।
तबाही का तांडव रचेगा,
एक दिन ये खतरनाक मर्ज।
मौसम चक्र अनियमित हो गया,
गर्मी लंबी होती जा रहीं।
सर्द रितु की अवधि और ठंड,
पृथ्वी पहले से कम पा रही।
आओ आज मिल कर प्रण करें,
हम प्रदूषण दूर भगाएंगे।
धरा को अपने प्रयासों से,
रहने के लायक बनाएंगे।
— भगत राम मंडोत्रा
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